जिसे दिया भगवान का दर्जा, वही लूट रहे मरीजों को

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जिसे दिया भगवान का दर्जा, वही लूट रहे मरीजों को

हमारे भारत देश में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है, कहते हैं जान बचाने वाले को ईश्वर से कम नहीं माना जाता लेकिन, जब डॉक्टर ही मरीज़ को लूटने लगे तब बेचारा बीमार इंसान कहा जाएगा। आजकल ऐसी ठगी बहुत आम हो गई है, अस्पतालों में मरीज़ों को भर्ती करने के बाद झूठी बीमारियां बता कर पैसे लूटने वाली ठगी ही उनका धंधा बन चुका है।

यह पूरी प्रक्रिया में पहले डॉ. मरीज़ के टेस्ट लिखते हैं और जब उन टेस्ट का रिजल्ट आता है तो उन्हें गंभीर बीमारियों से ग्रसित बता दिया जाता है। फिर उन्हें डराया जाता है, की अगर समय रहते इलाज शुरू नहीं किया तो जान भी जा सकती है इसी दबाव में आकर मरीज़ बेचारा कर्जा तक लेकर इलाज शुरू करवाता है। कई बार ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां फर्जी डॉ गांव में जाकर मेडिकल कैम्प लगाते है और निरीक्षण के दौरान उन्हें बोलते है की आप किसी बड़ी बीमारी से संक्रमित है।

ऐसे काफ़ी सारे मामले पहले भी दर्ज हुए है और उनसे जितनी ज़्यादा राशि वह लूट पाए  उतना लूट कर उनको साधारण विटामिन की गोलियां थमा कर फरार हो जाते है। यह सब ठगी का मुख्य कारण इन विषयों पर उच्च ज्ञान न होना और अशिक्षित होना भी है। क्योंकि जिन परिवारों को शिक्षा अच्छे से नहीं प्राप्त होती वह इन मुद्दों पर ख़ास जानकारी नहीं रखते और ऐसी धांधलियों का शिकार हो जाते है।

शिक्षा से ही आएगी जागरूकता

इसलिए हमारा शिक्षित होना बहुत जरूरी है जिससे हमें हमारे अधिकारों एवं जिम्मेदारियों का ज्ञान हो, अगर हम जागरूक रहेंगे तो अपने परिवार जनों को ऐसे फ्रॉड से बचा पाएंगे। ऐसा धोका केवल ठगी नहीं यह इंसानियत को भी शर्मसार करने वाला मामला है इससे ना  केवल हमारा भरोसा टूट जाता है बल्कि डॉ. जिन्हें हम भगवान का दूसरा स्वरूप भी कहते हैं, उनके लिए गुस्से और नफ़रत की भावना पनपने लगती है।

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कोई परिवार जब ऐसे मामलों से गुजरता है तो ना सिर्फ़ वो आर्थिक तंगी का सामना करते हैं बल्कि मानसिक पीड़ा का भी सामना करते हैं। ऐसे मामलों में उनका मनोबल टूट जाता है जब हमारा कोई अपना ऐसी परिस्थिति में फंस जाता है और हम समय रहते पैसे नहीं जुटा पाते तो यह समस्या इंसान को अंदर ही अंदर खाने लगती है।

ऐसी धोखा–धडी से बचने के लिए हमें सरकारी अस्पताल में जाकर जाँच करवानी चाहिए और डॉक्टर जिससे हम इलाज ले रहे है उसके रजिस्ट्रेशन की जांच करनी चाहिए। ऐसे मामलों में जागरूकता बनाकर रखना चाहिए और अगर कोई भी शंका हो तो तुरंत प्रशासन को सूचना देना चाहिए ताकि आप खुद को और अपने परिवार को ऐसे धांधली बाजी की चपेट में आने से बच पाए।

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